Online Shopping: फर्जी डिस्काउंट का खेल होगा बंद, सरकार ला रही नए नियम, जानिए ग्राहकों को क्या मिलेगा फायदा

Online shopping (नई दिल्ली):-  ऑनलाइन शॉपिंग में बड़े-बड़े डिस्काउंट देखकर सामान खरीदने वालों के लिए बड़ी खबर है। अब ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए फर्जी डिस्काउंट, भ्रामक ऑफर और ग्राहकों को गुमराह करने वाले तरीकों पर लगाम कसने की तैयारी है। सरकार ने ई-कॉमर्स से जुड़े नियमों में बदलाव किया है, जिनका मकसद ऑनलाइन खरीदारी को ज्यादा पारदर्शी बनाना और ग्राहकों के हितों की रक्षा करना है। नए नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे।

दरअसल, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कई बार किसी प्रोडक्ट पर 70 या 80 फीसदी तक की छूट दिखाई जाती है। लेकिन खरीदारी के समय ग्राहक को पता चलता है कि वास्तविक बचत उतनी नहीं है, online shopping: विज्ञापन में दिखाई गई थी। नए नियमों के बाद इस तरह की व्यवस्था पर रोक लगाने की कोशिश की जाएगी।

online shopping: डिस्काउंट से लेकर सर्च रिजल्ट तक बदलेगा सिस्टम

नए नियमों के तहत किसी प्रोडक्ट पर डिस्काउंट दिखाते समय ई-कॉमर्स कंपनी को घटी हुई कीमत के साथ उसकी पुरानी कीमत भी बतानी होगी। पुरानी कीमत उस प्रोडक्ट की वह कीमत मानी जाएगी, जिस पर उसे पिछले 30 दिनों में प्लेटफॉर्म पर बेचा गया था। इससे कंपनियों के लिए पहले कीमत बढ़ाकर फिर बड़ी छूट दिखाने की गुंजाइश कम होगी और ग्राहक वास्तविक बचत का अंदाजा लगा सकेंगे।

सरकार ने सिर्फ कीमत और डिस्काउंट ही नहीं, बल्कि सर्च रिजल्ट को लेकर भी नियम सख्त किए हैं। कंपनियां इस तरह सर्च रिजल्ट में बदलाव नहीं कर सकेंगी, जिससे ग्राहक किसी खास प्रोडक्ट की तरफ गुमराह होकर आकर्षित हो। वहीं स्पॉन्सर्ड या पेड लिस्टिंग की पहचान स्पष्ट रूप से करनी होगी, ताकि ग्राहक को पता रहे कि कौन-सा प्रोडक्ट सामान्य सर्च का हिस्सा है और कौन-सा पैसे देकर ऊपर दिखाया गया है।

online shopping: Dark Patterns पर भी होगी सख्ती

ग्राहकों को किसी खास विकल्प की तरफ धकेलने या उनकी पसंद को प्रभावित करने वाले डार्क पैटर्न पर भी सरकार की नजर है। ई-कॉमर्स कंपनियों को ‘डार्क पैटर्न्स, 2023’ से जुड़ी गाइडलाइंस का पालन करना होगा। इसके साथ ही कंपनियों को हर साल अपना सेल्फ-ऑडिट करना होगा और नियमों के पालन से जुड़ा कंप्लायंस सर्टिफिकेट भी दिखाना होगा।

ग्राहकों की शिकायतों को लेकर भी व्यवस्था मजबूत की जा रही है। हर ई-कॉमर्स यूनिट को नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन की कन्वर्जेंस प्रक्रिया का हिस्सा बनना होगा। सरकार के मुताबिक, 2025 में नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन को 17,71,622 शिकायतें मिली थीं, जिनमें करीब 29 फीसदी यानी 5,11,196 शिकायतें ई-कॉमर्स सेक्टर से जुड़ी थीं। नए प्रावधानों के तहत ग्राहक को अपनी दर्ज शिकायत की आधिकारिक कॉपी भी उपलब्ध करानी होगी।

इसके अलावा प्रोडक्ट की जानकारी को लेकर भी कंपनियों की जिम्मेदारी बढ़ेगी। विक्रेता को Best Before/Use Before, रिटर्न, रिफंड, वारंटी, डिलीवरी और पेमेंट की शर्तों की स्पष्ट जानकारी देनी होगी। आयातित सामान के मामले में इंपोर्टर की जानकारी और Country of Origin भी बताना जरूरी होगा।

यानी नए नियम लागू होने के बाद ऑनलाइन खरीदारी में ग्राहकों को सिर्फ आकर्षक ऑफर नहीं, बल्कि कीमत, डिस्काउंट और प्रोडक्ट से जुड़ी ज्यादा स्पष्ट जानकारी मिलेगी। सरकार का दावा है कि इससे ई-कॉमर्स बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी और ग्राहकों को भ्रामक ऑफर से बचाने में मदद मिलेगी।

 

 

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