Droupadi Murmu (नई दिल्ली):- राजधानी दिल्ली में भारत और ईरान के बीच कूटनीतिक गतिविधियां तेज होती नजर आईं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से मुलाकात की। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब पश्चिम एशिया की स्थिति, क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक कूटनीति को लेकर दुनिया भर में चर्चा तेज है। ऐसे में दोनों राष्ट्राध्यक्षों की मुलाकात को भारत-ईरान संबंधों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन भारत की यात्रा पर हैं और BRICS Summit 2026 में हिस्सा ले रहे हैं। उनकी यात्रा को भारत और ईरान के बीच उच्चस्तरीय संवाद को आगे बढ़ाने के अवसर के तौर पर देखा जा रहा है। दिल्ली में राष्ट्रपति मुर्मू के साथ उनकी मुलाकात इसी व्यापक कूटनीतिक संपर्क का हिस्सा है।
भारत और ईरान के बीच संबंध ऐतिहासिक रहे हैं। दोनों देशों के बीच सभ्यता, संस्कृति और व्यापारिक संपर्क का लंबा इतिहास है। आधुनिक दौर में दोनों देशों के रिश्तों में आर्थिक सहयोग, ऊर्जा, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय मुद्दों की भूमिका लगातार बढ़ी है। ऐसे में शीर्ष नेतृत्व के बीच नियमित बातचीत दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
Droupadi Murmu: पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी नजर
राष्ट्रपति पेजेशकियन की भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है जब पश्चिम एशिया में तनाव और क्षेत्रीय अस्थिरता अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बनी हुई है। भारत ने विभिन्न मौकों पर क्षेत्र में शांति, स्थिरता और संवाद की जरूरत पर जोर दिया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पेजेशकियन के साथ अपनी हालिया बातचीत के दौरान पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा की थी। भारत ने क्षेत्रीय विवादों के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति को महत्वपूर्ण माध्यम बताया है। साथ ही समुद्री मार्गों की सुरक्षा और निर्बाध व्यापार को भी भारत की प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है।
पश्चिम एशिया की स्थिति का सीधा असर वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। भारत के लिए यह विषय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश की ऊर्जा जरूरतों और विदेशों में रहने वाले भारतीय नागरिकों के हितों का क्षेत्र से गहरा संबंध है।
Droupadi Murmu: भारत-ईरान के लिए क्यों महत्वपूर्ण है BRICS?
पेजेशकियन की भारत यात्रा का एक अहम पहलू BRICS Summit भी है। BRICS के विस्तार के बाद ईरान की इस मंच पर मौजूदगी भारत-ईरान संवाद को एक व्यापक बहुपक्षीय संदर्भ देती है।
भारत BRICS में विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने, आर्थिक सहयोग बढ़ाने और वैश्विक संस्थाओं में सुधार की जरूरत पर जोर देता रहा है। ईरान के साथ BRICS जैसे मंच पर सहयोग भारत के लिए क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर संवाद का अतिरिक्त अवसर उपलब्ध कराता है।
दोनों देशों के लिए व्यापार और कनेक्टिविटी भी महत्वपूर्ण विषय हैं। भारत लंबे समय से ईरान के साथ कनेक्टिविटी परियोजनाओं और व्यापारिक मार्गों को महत्व देता रहा है। ऐसे में आने वाले समय में इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर नजर रहेगी।
Droupadi Murmu: चाबहार कनेक्टिविटी पर भी रहेगी नजर
भारत और ईरान के संबंधों में चाबहार बंदरगाह का विशेष महत्व है। यह परियोजना भारत को ईरान के रास्ते मध्य एशिया और उससे आगे के बाजारों तक बेहतर कनेक्टिविटी देने की क्षमता रखती है।
व्यापार और क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करने के लिहाज से चाबहार भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं में महत्वपूर्ण है। इसलिए भारत-ईरान के बीच उच्चस्तरीय बातचीत के दौरान कनेक्टिविटी से जुड़े मुद्दों पर आगे भी ध्यान बना रह सकता है।
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Droupadi Murmu: आगे क्या होगा?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि राष्ट्रपति मुर्मू और राष्ट्रपति पेजेशकियन की मुलाकात के बाद भारत-ईरान संबंध किस दिशा में आगे बढ़ते हैं। आने वाले समय में व्यापार, निवेश, ऊर्जा, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सहयोग जैसे क्षेत्रों में नई पहल देखने को मिल सकती है।
BRICS Summit के दौरान भारत और ईरान के शीर्ष नेतृत्व के बीच लगातार संपर्क यह संकेत देता है कि दोनों देश अपने संबंधों को मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप मजबूत बनाए रखना चाहते हैं।
दिल्ली में हुई यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब दुनिया पश्चिम एशिया के बदलते समीकरणों पर नजर रख रही है। इसलिए आने वाले दिनों में भारत और ईरान की ओर से होने वाली किसी भी नई घोषणा या समझौते पर खास नजर रहेगी।
कुल मिलाकर, मुर्मू-पेजेशकियन की मुलाकात भारत और ईरान के बीच जारी उच्चस्तरीय संवाद की अहम कड़ी है। अब देखना होगा कि इस मुलाकात के बाद दोनों देशों के रिश्तों में अगला बड़ा कदम क्या होता है और बदलती क्षेत्रीय परिस्थितियों के बीच भारत अपनी कूटनीतिक भूमिका को किस तरह आगे बढ़ाता है।