Bribe Case (रायपुर): छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रिश्वतखोरी के एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि केवल आरोपी के पास से रिश्वत की रकम बरामद होना दोषसिद्धि के लिए पर्याप्त नहीं है। अभियोजन पक्ष को यह साबित करना जरूरी है कि आरोपी ने रिश्वत की मांग की थी और उसे स्वीकार भी किया था। अदालत ने इसी आधार पर सूरजपुर के जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में पदस्थ एक लेखापाल की दोषसिद्धि को रद्द करते हुए उसे बरी कर दिया।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी की अदालत में हुई। हाईकोर्ट ने 18 सितंबर को अपील पर फैसला सुनाते हुए कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिश्वत की मांग का प्रमाण मामले की बुनियादी आवश्यकता है। केवल कथित तौर पर रिश्वत की रकम बरामद होने से अपराध स्वतः साबित नहीं होता।
Bribe Case: क्या था पूरा मामला?
अभियोजन के अनुसार, मां सरस्वती शिक्षा समिति द्वारा संचालित एक स्कूल की मान्यता से संबंधित काम के बदले लेखापाल पर 15 हजार रुपये रिश्वत मांगने का आरोप था। बाद में कथित रकम 8 हजार रुपये तय होने की बात कही गई। शिकायत के आधार पर एंटी करप्शन ब्यूरो ने 30 जून 2014 को सूरजपुर के जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में ट्रैप कार्रवाई की थी। कार्रवाई के दौरान 8 हजार रुपये के नोट आरोपी की जेब से बरामद किए गए थे।
हालांकि, मुकदमे के दौरान शिकायतकर्ता ने अभियोजन के आरोप का समर्थन नहीं किया। उसने अदालत में कहा कि लेखापाल ने उससे रिश्वत की मांग नहीं की थी। एक अन्य गवाह ने भी दावा किया कि पैसे जबरन आरोपी की जेब में रखे गए थे। हाईकोर्ट ने माना कि रिश्वत मांगने के मुख्य आरोप की पुष्टि करने वाला पर्याप्त साक्ष्य रिकॉर्ड पर नहीं था।
Bribe Case: इलेक्ट्रॉनिक सबूतों पर भी उठे सवाल
मामले में कथित बातचीत की इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्डिंग को भी रिश्वत की मांग साबित करने के लिए पेश किया गया था। हाईकोर्ट ने पाया कि रिकॉर्डिंग के संबंध में आवश्यक प्रमाण-पत्र उपलब्ध नहीं था। इसके अलावा आरोपी की आवाज का नमूना भी नहीं लिया गया और रिकॉर्डिंग की आवाज की फॉरेंसिक जांच नहीं कराई गई थी।
इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने मार्च 2017 में विशेष अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को रद्द कर दिया और आरोपी लेखापाल को रिश्वत के आरोपों से बरी कर दिया। फैसला इस बात को रेखांकित करता है कि भ्रष्टाचार के मामलों में आरोप साबित करने के लिए साक्ष्यों की गुणवत्ता और कानूनी प्रक्रिया दोनों महत्वपूर्ण हैं।