Rajiv kumar (नई दिल्ली):- देश में UPI पर MDR यानी Merchant Discount Rate लगाने की तैयारी के बीच नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने सरकार को बड़ी सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि UPI लेनदेन को कुछ और सालों तक बिना किसी फीस के ही जारी रखा जाना चाहिए।
दरअसल, सरकार UPI के Free मॉडल को खत्म करके दुकानदारों पर MDR लगाने पर विचार कर रही है। खबर है कि 2000 रुपये से ज्यादा के भुगतान पर दुकानदारों से 0.3% तक फीस वसूली जा सकती है।
Rajiv kumar: राजीव कुमार ने क्या कहा?
राजीव कुमार ने कहा, “UPI भारत की सबसे बड़ी Digital Public Infrastructure की सफलता है। इसने गरीब, छोटे दुकानदार और आम आदमी को Digital Economy से जोड़ा है। अगर अभी इस पर फीस लगाई गई तो यह पूरी क्रांति रुक सकती है।”
Rajiv kumar: उन्होंने 3 बड़ी वजह बताईं
1. छोटे व्यापारियों पर बोझ पड़ेगा: देश में 6 करोड़ से ज्यादा छोटे किराना दुकानदार UPI इस्तेमाल करते हैं। उन पर 0.3% भी बड़ा बोझ है। वे वापस Cash पर चले जाएंगे।
2. जनता पर ही आएगा बोझ: आखिर में दुकानदार यह फीस ग्राहकों से ही वसूलेगा। सामान महंगा हो जाएगा। UPI Free है इसलिए लोग इस्तेमाल करते हैं।
3. Cash Economy वापस आ सकती है: भारत ने बड़ी मुश्किल से Cashless Economy की तरफ कदम बढ़ाया है। फीस लगने से लोग फिर से नकद लेनदेन को तरजीह देंगे, जिससे काला धन बढ़ेगा।
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उन्होंने कहा कि सरकार को UPI को कम से कम 3-4 साल और सब्सिडी देनी चाहिए, जब तक UPI से होने वाली बचत से बैंकों का खर्च निकलने न लगे।
Rajiv kumar: क्या है सरकार का प्लान?
RBI और वित्त मंत्रालय का तर्क है कि UPI चलाने में बैंकों और Payment कंपनियों को सालाना 12,000 करोड़ रुपये का खर्च आता है। अभी तक सरकार सब्सिडी देती है। लेकिन UPI अब बहुत बड़ा हो गया है – हर महीने 18 लाख करोड़ से ज्यादा का लेनदेन। इसलिए अब MDR लगाकर इसे कमाई का मॉडल बनाया जाए।