सामाजिक कार्यकर्ता:रॉबर्ट्सगंज। तिलौली निवासी वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद् एवं साहित्यप्रेमी ठाकुर खड्गजंगबहादुर सिंह के निधन से सोनांचल के सामाजिक, साहित्यिक और शैक्षिक जगत में शोक की लहर है। उन्होंने काशी में अंतिम सांस ली। उनके निधन पर क्षेत्र के लोगों ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे एक ऐसे व्यक्तित्व का अवसान बताया, जिसने कई दशकों तक शिक्षा, साहित्य और सामाजिक जीवन में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई।
ठाकुर खड्गजंगबहादुर सिंह का जन्म एक प्रतिष्ठित बैसवंशीय क्षत्रिय परिवार में हुआ था। उनके पिता ठाकुर पुरुषोत्तम सिंह गाजीपुर के निवासी थे और ब्रिटिश शासनकाल में रॉबर्ट्सगंज में दरोगा के पद पर कार्यरत रहे। बताया जाता है कि अगोरी-बड़हर रियासत के तत्कालीन राजा शारदामहेशप्रसाद सिंह शाह ने उन्हें आमडीह और तिलौली गांव प्रदान किए थे। बाद में तिलौली ही ठाकुर साहब की कर्मभूमि और उनकी प्रमुख पहचान बन गया।
शिक्षा और साहित्य से रहा गहरा जुड़ाव
सामाजिक कार्यकर्ता:ठाकुर खड्गजंगबहादुर सिंह का शिक्षा और साहित्य के प्रति विशेष अनुराग था। उन्होंने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से हिन्दी में परास्नातक की शिक्षा प्राप्त की। हिन्दी के प्रख्यात आलोचक प्रो. नामवर सिंह उनके अध्यापक रहे। उच्च शिक्षा के दौरान विकसित साहित्यिक रुचि जीवनभर उनके व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी रही।
शिक्षा के क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। वे लंबे समय तक भारतीय इंटर कॉलेज, घोरावल के प्रबंधक रहे। उनका मानना था कि शिक्षा केवल व्यक्तिगत विकास का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के निर्माण और नई पीढ़ी को बेहतर दिशा देने का महत्वपूर्ण साधन है।
सामाजिक और साहित्यिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका
सामाजिक कार्यकर्ता:ठाकुर साहब का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी दीर्घकालीन जुड़ाव रहा और उन्होंने सोनभद्र के जिलासंघचालक का दायित्व भी संभाला। उनके परिचितों के अनुसार अनुशासन, स्पष्टवादिता, न्यायप्रियता और आत्मीय व्यवहार उनके व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषताएं थीं।
सोनभद्र के साहित्यिक क्षेत्र में भी उनका विशेष सम्मान था। कविराज पं. रमाशंकर पाण्डेय ‘विकल’ द्वारा स्थापित सोनांचल साहित्यकार संस्थान की मासिक कविगोष्ठियों में उनकी नियमित उपस्थिति रहती थी। वे साहित्यकारों और रचनाकारों को प्रोत्साहित करते रहे तथा साहित्यिक आयोजनों में उनकी मौजूदगी कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाती थी।
सामाजिक कार्यकर्ता:परिजनों और आत्मीयजनों के अनुसार ठाकुर खड्गजंगबहादुर सिंह सामाजिक रिश्तों को विशेष महत्व देते थे। उनके निधन से क्षेत्र ने एक ऐसे वरिष्ठ अभिभावक को खो दिया, जिनसे कई पीढ़ियों को स्नेह, मार्गदर्शन और आत्मीयता मिली।
काशी में जीवन की अंतिम यात्रा पूर्ण करने वाले ठाकुर खड्गजंगबहादुर सिंह की स्मृतियां उनके शैक्षिक, सामाजिक और साहित्यिक योगदान के रूप में लंबे समय तक जीवित रहेंगी। उनके निधन पर दादा भाई अजय सिंह, वरिष्ठ अधिवक्ता ठाकुर सबल सिंह सहित शोकाकुल परिवार के प्रति क्षेत्रवासियों ने गहरी संवेदना व्यक्त की और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।