AI Data Centre (नई दिल्ली): भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग के बीच डेटा सेंटर उद्योग तेजी से विस्तार कर रहा है। हालांकि इस तेजी के साथ बिजली की उपलब्धता, पानी, साइबर सुरक्षा और बुनियादी ढांचे की मजबूती से जुड़ी चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले वर्षों में डेटा सेंटर क्षमता में बड़ा इजाफा होने की संभावना है।
बीमा ब्रोकर Aon की रिपोर्ट के अनुसार भारत की स्थापित डेटा सेंटर क्षमता 2030 तक चार गुना से अधिक बढ़ सकती है। कई नई परियोजनाओं पर पहले से काम चल रहा है। ऐसे में किसी डेटा सेंटर के लिए केवल जमीन और निवेश ही पर्याप्त नहीं होंगे, बल्कि लगातार और भरोसेमंद बिजली की उपलब्धता भी परियोजनाओं की गति और स्थान तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
AI से बढ़ रही बिजली की मांग
AI आधारित सेवाओं और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग के विस्तार से डेटा सेंटर में बिजली की खपत बढ़ रही है। रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक स्तर पर डेटा सेंटर की बिजली मांग 2030 तक 165 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। भारत में भी इस बढ़ती मांग का असर बिजली नेटवर्क और नई परियोजनाओं की योजना पर पड़ने की संभावना है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत की डेटा सेंटर क्षमता 2020 में करीब 375 मेगावाट से बढ़कर अगस्त 2026 तक लगभग 1.57 गीगावाट हो चुकी थी। सरकार के मुताबिक 2030 तक यह क्षमता करीब 8 गीगावाट तक पहुंच सकती है। वहीं केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने 2031-32 तक डेटा सेंटर क्षेत्र की बिजली मांग करीब 17 गीगावाट रहने का अनुमान लगाया है।
AI Data Centre: वैकल्पिक ऊर्जा पर बढ़ रहा जोर
बिजली ग्रिड पर दबाव और कनेक्शन में संभावित देरी को देखते हुए डेटा सेंटर संचालक ऑन-साइट पावर जनरेशन, बैटरी स्टोरेज और हाइब्रिड ऊर्जा प्रणालियों जैसे विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। हालांकि इन व्यवस्थाओं के साथ संचालन, रखरखाव और आग से जुड़े अतिरिक्त जोखिम भी पैदा हो सकते हैं।
पानी और कूलिंग भी बड़ी चुनौती
डेटा सेंटर में सर्वर लगातार काम करते हैं, जिससे गर्मी पैदा होती है और उन्हें प्रभावी कूलिंग की जरूरत होती है। AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ सर्वर की पावर डेंसिटी और कूलिंग की जरूरत भी बढ़ रही है। ऐसे में पानी की उपलब्धता विशेष रूप से उन इलाकों में महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकती है, जहां पहले से जल संसाधनों पर दबाव है।
CEEW की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में डेटा सेंटर की स्थापित क्षमता करीब 1.5 गीगावाट तक पहुंच चुकी थी और 2030 तक इसके लगभग 4.5 से 6.5 गीगावाट तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया था। रिपोर्ट ने बिजली और पानी दोनों के बढ़ते इस्तेमाल को दीर्घकालिक योजना का अहम हिस्सा बताया है।
AI Data Centre: साइबर सुरक्षा का बढ़ता जोखिम
डेटा सेंटर के साथ साइबर सुरक्षा भी बड़ी चुनौती बन रही है। आधुनिक सुविधाएं डिजिटल मॉनिटरिंग, इंटरकनेक्टेड कंट्रोल सिस्टम और थर्ड-पार्टी वेंडर्स पर निर्भर करती हैं। ऐसे नेटवर्क में साइबर घटना होने पर सेवाओं में रुकावट और लंबे समय तक कारोबार प्रभावित होने का जोखिम हो सकता है।
Aon के अनुसार डेटा सेंटर परियोजनाओं में डिजाइन और निर्माण से लेकर बिजली, पानी, साइबर सुरक्षा और संचालन तक पूरे जीवनचक्र के जोखिमों का आकलन जरूरी होगा। भारत के डिजिटल और AI विस्तार के लिए डेटा सेंटर महत्वपूर्ण आधारभूत ढांचा बन रहे हैं, इसलिए इनके विकास के साथ जोखिम प्रबंधन और संसाधनों की दीर्घकालिक योजना पर भी ध्यान देना होगा।