Personal Finance: HDFC Bank का बड़ा फैसला: MCLR में 15 BPS तक कटौती, जानिए आम आदमी की EMI पर कितना पड़ेगा असर

Personal Finance: नई दिल्ली: एचडीएफसी बैंक के लाखों ग्राहकों के लिए लोन से जुड़ी राहत की खबर सामने आई है। बैंक ने अपनी मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स-बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) में 15 बेसिस पॉइंट तक की कटौती की है। नई दरें 7 अक्टूबर 2026 से लागू हो गई हैं। अलग-अलग अवधि के हिसाब से MCLR अब 7.80 फीसदी से 8.55 फीसदी के बीच है।

किस अवधि की MCLR कितनी हुई?

HDFC Bank ने सभी प्रमुख टेन्योर की MCLR में कमी की है। ओवरनाइट MCLR 7.90% से घटकर 7.80% हो गई है। वहीं एक महीने की MCLR में सबसे ज्यादा 15 बेसिस पॉइंट की कटौती हुई और यह 7.90% से घटकर 7.75% रह गई।

Personal Finance: तीन महीने की MCLR अब 8.05% से घटकर 7.95%, छह महीने की दर 8.25% से घटकर 8.15% और एक साल की MCLR 8.35% से घटकर 8.30% हो गई है। दो साल की दर 8.45% से घटकर 8.40% और तीन साल की MCLR 8.60% से घटकर 8.55% हो गई है।

आम आदमी की EMI पर क्या असर पड़ेगा?

Personal Finance: MCLR में कटौती का सीधा फायदा उन ग्राहकों को मिल सकता है, जिनका फ्लोटिंग रेट वाला लोन MCLR से जुड़ा हुआ है। ऐसे ग्राहकों की ब्याज दर उनके लोन के रीसेट होने पर कम हो सकती है। इसका परिणाम कम EMI या समान EMI के साथ लोन की अवधि घटने के रूप में सामने आ सकता है।

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हालांकि हर HDFC Bank ग्राहक की EMI तुरंत कम नहीं होगी। इसका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि उसका लोन किस बेंचमार्क से जुड़ा है, उसका स्प्रेड कितना है और लोन का रीसेट पीरियड क्या है। इसलिए केवल MCLR घटने से सभी ग्राहकों की EMI में समान कमी की उम्मीद नहीं की जा सकती।

नए होम लोन लेने वालों को कितना फायदा?

Personal Finance: यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। 2019 से नए रिटेल और होम लोन को आम तौर पर बाहरी बेंचमार्क, जैसे RBI रेपो रेट, से जोड़ा जाता है। HDFC Bank की मौजूदा जानकारी में भी EBLR को RBI की पॉलिसी रेपो रेट और अन्य बाहरी बेंचमार्क से जोड़ा गया है। इसलिए नए होम लोन लेने वाले हर ग्राहक को MCLR कटौती का सीधा लाभ जरूरी नहीं मिलेगा।

वहीं पुराने MCLR-लिंक्ड लोन वाले ग्राहकों के लिए यह बदलाव ज्यादा प्रासंगिक है।

RBI की रेपो रेट बढ़ोतरी के बीच क्यों अहम है फैसला?

Personal Finance: HDFC Bank की MCLR कटौती ऐसे समय हुई है जब RBI ने 7 अक्टूबर को रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.50% कर दिया है। यानी एक तरफ केंद्रीय बैंक ने नीतिगत दर बढ़ाई, जबकि HDFC Bank ने MCLR में कमी की है।

इसलिए ग्राहकों को अपने लोन की वास्तविक ब्याज दर, बेंचमार्क और अगली रीसेट तारीख जरूर जांचनी चाहिए। केवल MCLR में बदलाव देखकर EMI में होने वाली बचत का अनुमान लगाना सही नहीं होगा।

ग्राहक क्या करें?

Personal Finance: अगर आपका लोन HDFC Bank की MCLR से जुड़ा है, तो सबसे पहले अपने लोन एग्रीमेंट में बेंचमार्क, स्प्रेड और रीसेट फ्रीक्वेंसी चेक करें। इसके बाद बैंक से पूछें कि नई MCLR आपके लोन पर कब लागू होगी।

कुल मिलाकर, HDFC Bank की यह कटौती MCLR-लिंक्ड उधारकर्ताओं के लिए राहत लेकर आई है, लेकिन वास्तविक फायदा हर ग्राहक के लोन की शर्तों पर निर्भर करेगा।

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