मुरली मनोहर जोशी:नई दिल्ली: चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच 42 पूर्व न्यायाधीशों और सेवानिवृत्त संवैधानिक पदाधिकारियों ने एक खुला पत्र जारी किया है। 7 अक्टूबर को लिखे गए इस पत्र में चुनाव आयोग, न्यायपालिका और अन्य संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने के प्रयासों पर गंभीर चिंता जताई गई है।

पत्र में पूर्व न्यायाधीशों ने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की आलोचना लोकतंत्र में लोगों का अधिकार है, लेकिन उन्हें लगातार बदनाम करने की कोशिश लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता के भरोसे को प्रभावित कर सकती है। पत्र में कहा गया, “संस्थाओं की आलोचना करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन बदनाम करना नहीं।”
‘वोट चोरी’ के आरोपों पर क्या कहा?
मुरली मनोहर जोशी:पूर्व जजों ने बिना पर्याप्त सबूत के लगाए जा रहे ‘वोट चोरी’ जैसे आरोपों पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि संवैधानिक संस्थाओं को सार्वजनिक मंचों से ‘चोर’, ‘कठपुतली’ या ‘समझौता किया हुआ’ बताने से लोगों का चुनावी प्रक्रिया पर विश्वास कमजोर हो सकता है। उन्होंने राजनीतिक दलों से चुनाव संबंधी शिकायतों को स्थापित कानूनी और संवैधानिक प्रक्रियाओं के जरिए उठाने की अपील की।
SIR प्रक्रिया का किया समर्थन
मुरली मनोहर जोशी:पत्र में Special Intensive Revision (SIR) यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का भी समर्थन किया गया है। पूर्व न्यायाधीशों ने इसे मतदाता सूची को साफ और अपडेट रखने के उद्देश्य से की जाने वाली कानूनी प्रक्रिया बताया। उनके मुताबिक, चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाने के बजाय संबंधित दावों और आपत्तियों को उचित मंच पर प्रमाण के साथ रखा जाना चाहिए।
विपक्ष कर रहा है चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन
मुरली मनोहर जोशी:यह खुला पत्र ऐसे समय सामने आया है जब विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। विपक्ष ने SIR और मतदाता सूचियों को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं तथा चुनाव आयोग पर पक्षपात के आरोप लगाए हैं। चुनाव आयोग और बीजेपी ने इन आरोपों को खारिज किया है।
वहीं, 5 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानेश कुमार को अंतरिम तौर पर निलंबित करने की मांग वाली याचिका पर तत्काल आदेश देने से इनकार किया था। अदालत ने कहा था कि वह केवल मीडिया रिपोर्टों के आधार पर आदेश नहीं दे सकती और पहले संबंधित पक्षों से जवाब मांगे जाएंगे।
‘लोकतंत्र का भरोसा बनाए रखना जरूरी’
मुरली मनोहर जोशी:पूर्व न्यायाधीशों ने अपने पत्र में लोकतंत्र में विश्वास को बेहद महत्वपूर्ण बताया और चेतावनी दी कि चुनावी प्रक्रिया को लगातार अविश्वसनीय बताने से संस्थाओं में जनता का भरोसा प्रभावित हो सकता है। उन्होंने राजनीतिक दलों, मीडिया और नागरिकों से संवैधानिक संस्थाओं के साथ जिम्मेदारी से व्यवहार करने की अपील की है।
इस पूरे विवाद के बीच एक तरफ विपक्ष चुनाव आयोग और SIR को लेकर सवाल उठा रहा है, वहीं 42 पूर्व न्यायाधीशों का यह पत्र संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने और आरोपों को प्रमाण तथा कानूनी प्रक्रिया के जरिए सामने रखने पर जोर देता है।