अलविदा नाना पाटेकर: हिंदी और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 8 अक्टूबर 2026 को 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। गोवा स्थित उनके आवास पर कार्डियक अरेस्ट के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित किया। उनके निधन की खबर सामने आते ही फिल्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई।
नाना पाटेकर का फिल्मी सफर करीब पांच दशक तक चला। उन्होंने गंभीर भूमिकाओं से लेकर कॉमेडी और नकारात्मक किरदारों तक अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी खास संवाद अदायगी, प्रभावशाली आवाज और किरदार में पूरी तरह ढल जाने की क्षमता ने उन्हें सिनेमा के विशिष्ट अभिनेताओं में शामिल किया।
‘अग्निसाक्षी’ में यादगार भूमिका
1996 में रिलीज हुई फिल्म ‘अग्निसाक्षी’ में नाना पाटेकर ने विश्वनाथ नाम के जुनूनी और हिंसक पति का किरदार निभाया था। फिल्म में उनके सामने मनीषा कोइराला थीं। इस भूमिका में उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति का चरित्र निभाया, जिसके व्यवहार में अधिकार जताने की प्रवृत्ति और डर पैदा करने वाला व्यक्तित्व दिखाई देता है। उनके अभिनय को दर्शकों और समीक्षकों से काफी सराहना मिली।
इस फिल्म में उनके अभिनय के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का सम्मान मिला। ‘अग्निसाक्षी’ का यह किरदार नाना पाटेकर के करियर की उन भूमिकाओं में गिना जाता है, जिनकी चर्चा उनके निधन के बाद एक बार फिर हो रही है।
अलविदा नाना पाटेकर: ‘क्रांतिवीर’ से ‘वेलकम’ तक अलग पहचान
नाना पाटेकर ने अपने करियर में कई अलग-अलग तरह की भूमिकाएं निभाईं। 1994 की फिल्म ‘क्रांतिवीर’ में उनके अभिनय को विशेष पहचान मिली और उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वहीं ‘परिंदा’, ‘तिरंगा’, ‘खामोशी: द म्यूजिकल’, ‘अब तक छप्पन’, ‘अपहरण’ और ‘नटसम्राट’ जैसी फिल्मों में भी उन्होंने प्रभावशाली अभिनय किया।
इसके अलावा ‘वेलकम’ में उदय शेट्टी का उनका किरदार दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुआ। गंभीर और नकारात्मक भूमिकाओं के लिए पहचाने जाने वाले नाना ने इस फिल्म में हास्य का अलग अंदाज दिखाया और नई पीढ़ी के दर्शकों के बीच भी अपनी मजबूत पहचान बनाई।
अभिनय के साथ निर्देशन में भी आजमाया हाथ
नाना पाटेकर सिर्फ अभिनेता ही नहीं थे, बल्कि लेखक, निर्देशक और थिएटर कलाकार के रूप में भी सक्रिय रहे। उन्होंने ‘प्रहार: द फाइनल अटैक’ का निर्देशन किया था। सिनेमा और कला के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें पद्म श्री से भी सम्मानित किया गया था।
करीब पांच दशक लंबे करियर में नाना पाटेकर ने हिंदी और मराठी सिनेमा में कई यादगार किरदार दिए। उनके निधन के साथ भारतीय सिनेमा ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया, जिसकी अभिनय शैली और संवाद अदायगी ने दर्शकों पर लंबे समय तक प्रभाव छोड़ा।