जापान पर्यावरण तकनीक: जापान की पर्यावरण संरक्षण कंपनी Hiyoshi की भारत पर नजर, जल और वायु प्रदूषण से निपटने में मिलेगी मदद

जापान पर्यावरण तकनीक: भारत में पर्यावरण संरक्षण तकनीक साझा करना चाहती है जापानी कंपनी

(टोक्यो): पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण के क्षेत्र में काम करने वाली जापानी कंपनी हियोशी (Hiyoshi) भारत में अपनी उन्नत तकनीक और विशेषज्ञता का विस्तार करना चाहती है। कंपनी का उद्देश्य जल और वायु प्रदूषण से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए भारत के साथ पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना है। जापान के शिगा प्रांत में स्थित इस कंपनी को बिवा झील (Lake Biwa) के संरक्षण में योगदान के कारण पर्यावरण की ‘रक्षक’ के रूप में पहचान मिली है।

कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी तदाशी सुजुकी के अनुसार, आर्थिक विकास के साथ भारत में पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। ऐसे में कंपनी भारत के साथ अपनी तकनीक और अनुभव साझा करना चाहती है, ताकि जल संसाधनों और पर्यावरण की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के प्रयासों को समर्थन मिल सके।

1955 में अपशिष्ट प्रबंधन से शुरू हुआ सफर

हियोशी की शुरुआत वर्ष 1955 में अपशिष्ट उपचार सेवा से हुई थी। समय के साथ कंपनी ने अपने काम का विस्तार करते हुए अपशिष्ट जल और सीवेज के विश्लेषण, जल गुणवत्ता की निगरानी तथा वायु गुणवत्ता के परीक्षण जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता विकसित की।

कंपनी की तकनीक का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण की स्थिति का वैज्ञानिक आकलन करना, प्रदूषण के स्तर की निगरानी करना और संरक्षण के लिए प्रभावी उपाय विकसित करने में सहायता देना है। कंपनी का मानना है कि किसी भी पर्यावरणीय समस्या का समाधान खोजने से पहले उसकी सही माप और जांच आवश्यक है।

जापान पर्यावरण तकनीक: बिवा झील के संरक्षण में निभाई अहम भूमिका

जापान की सबसे बड़ी झीलों में शामिल बिवा झील का संरक्षण हियोशी की पहचान से जुड़ा महत्वपूर्ण अध्याय है। वर्ष 1977 में झील के पानी की गुणवत्ता खराब होने और रेड टाइड जैसी समस्या सामने आने के बाद जल संरक्षण के प्रयास तेज हुए थे।

कंपनी के सीईओ तदाशी सुजुकी के अनुसार, सिंथेटिक डिटर्जेंट के इस्तेमाल से जुड़ी समस्या के कारण झील के पानी की गुणवत्ता प्रभावित हुई थी। स्थानीय नागरिकों, विशेषकर महिलाओं ने इसके खिलाफ जागरूकता अभियान चलाया। इसके बाद पानी की गुणवत्ता की निगरानी और सेप्टिक टैंकों के प्रबंधन जैसे उपायों को महत्व मिला।

इन प्रयासों ने कंपनी को जल गुणवत्ता परीक्षण और पर्यावरण प्रबंधन के क्षेत्र में पहचान दिलाई।

भारत में जल और सीवेज प्रबंधन पर जोर

भारत में तेजी से बढ़ते शहरीकरण और बदलती जलवायु के बीच जल और सीवेज प्रबंधन महत्वपूर्ण चुनौती बने हुए हैं। अनियमित वर्षा, कहीं अत्यधिक बारिश और कहीं पानी की कमी जैसी परिस्थितियां जल संसाधनों पर दबाव बढ़ाती हैं।

हियोशी भारत में जल गुणवत्ता की जांच, अपशिष्ट जल उपचार और पर्यावरणीय निगरानी से जुड़ी अपनी विशेषज्ञता साझा करना चाहती है। कंपनी के मुताबिक, पानी और हवा से जुड़ी पर्यावरणीय समस्याएं किसी एक देश तक सीमित नहीं रहतीं। इसलिए इनके समाधान के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और ज्ञान का आदान-प्रदान जरूरी है।

Ankita Bhandari Case: अंकिता भंडारी मामले में प्रदर्शन के बाद हरीश रावत समेत 31 कांग्रेस नेताओं पर FIR दर्ज

जापान पर्यावरण तकनीक: भारत-जापान सहयोग की संभावनाएं

कंपनी के अनुसार, एशिया और अमेरिका सहित विभिन्न क्षेत्रों से पर्यावरण संरक्षण तकनीक और प्रशिक्षण में सहयोग की मांग आती रही है। हियोशी के मुताबिक, 53 देशों के 1,110 से अधिक विदेशी शोधकर्ता उसकी उन्नत तकनीक का अध्ययन करने के लिए जापान आ चुके हैं।

भारत और जापान वर्ष 2027 में राजनयिक संबंधों की स्थापना के 75 वर्ष पूरे करेंगे। ऐसे में पर्यावरण संरक्षण, तकनीकी सहयोग और शोध के क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाने की संभावनाएं महत्वपूर्ण हैं।

हियोशी की भारत में रुचि से जल गुणवत्ता परीक्षण, सीवेज प्रबंधन और पर्यावरणीय तकनीक के क्षेत्र में सहयोग के नए अवसर बन सकते हैं। हालांकि, कंपनी की ओर से भारत के लिए किसी नई परियोजना की विस्तृत घोषणा इस रिपोर्ट में नहीं की गई है।

स्रोत: ANI की रिपोर्ट पर आधारित।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *