जौनपुर में जमीन विवाद के बीच शिकायतकर्ता की हत्या का आरोप, राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

भीटा की जमीन पर कब्जे, 40 हजार रुपये मांगने और IG​​RS में गलत रिपोर्ट लगाने के आरोप; शिकायतकर्ता की मौत के बाद निष्पक्ष जांच की मांग

केराकत, जौनपुर। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले की केराकत तहसील के बरामनपुर उमरवार क्षेत्र में जमीन विवाद और राजस्व विभाग की कथित कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर मामला सामने आया है। जमीन से संबंधित शिकायतें करने वाले रामरूप गौड़ पुत्र बेचन गौड़ के परिवार से जुड़े राजकुमार गौड़ (40 वर्ष) की कथित तौर पर मारपीट के बाद हत्या किए जाने की सूचना से इलाके में सनसनी फैल गई है। घटना के बाद जमीन विवाद, पूर्व में की गई शिकायतों और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।

शिकायत में राजस्व विभाग के लेखपाल अमरेंद्र सिंह पर IG​​RS शिकायतों के निस्तारण में कथित तौर पर गलत और भ्रामक रिपोर्ट लगाने, जमीन पर अवैध कब्जे के आरोपों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं करने तथा 40 हजार रुपये मांगने जैसे आरोप लगाए गए थे। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। संबंधित अधिकारियों का पक्ष और पुलिस जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

भीटा की जमीन पर कब्जे का आरोप

शिकायतकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया था कि ग्राम सभा में स्थित आराजी संख्या 839 और 840 भीटा की भूमि है। आरोप के अनुसार, राजकुमार वर्मा पुत्र भुल्लन ने उक्त जमीन पर मकान बनाकर कब्जा कर लिया। शिकायत में माता मंदिर की जमीन पर भी कथित कब्जे का उल्लेख किया गया था।

शिकायतकर्ता का कहना था कि जमीन से संबंधित विवाद को लेकर कई बार शिकायत की गई, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उसने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया था कि शिकायतों का निस्तारण मौके की वास्तविक स्थिति की निष्पक्ष जांच किए बिना किया गया।

हालांकि, जमीन पर कब्जे की वास्तविक स्थिति निर्धारित करने के लिए राजस्व अभिलेखों, स्थल निरीक्षण और संबंधित पक्षों के दस्तावेजों की जांच आवश्यक है।

IG​​RS शिकायत में पुरानी तस्वीर के इस्तेमाल का आरोप

शिकायत के मुताबिक, 22 सितंबर 2026 को IG​​RS पोर्टल पर शिकायत संख्या 40019426069665 दर्ज कराई गई थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि शिकायत के निस्तारण के दौरान 1 जून 2026 की पुरानी तस्वीर का इस्तेमाल करते हुए रिपोर्ट लगा दी गई।

शिकायतकर्ता का यह भी कहना था कि रिपोर्ट में आराजी संख्या 839 का उल्लेख किया गया, जबकि आराजी संख्या 840 को नजरअंदाज कर दिया गया। इसके अलावा, उसने 40 हजार रुपये की मांग किए जाने का आरोप भी लगाया था।

इन आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित शिकायत की मूल प्रति, निस्तारण रिपोर्ट, तस्वीरों की तारीख और राजस्व विभाग के अभिलेखों की जांच जरूरी है। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी भी आरोप को प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।

मारपीट के बाद हत्या की सूचना से बढ़ी गंभीरता

जमीन विवाद से जुड़े इस मामले में शिकायतकर्ता के परिवार से संबंधित राजकुमार गौड़ (40 वर्ष) की कथित तौर पर मारपीट के बाद हत्या किए जाने की सूचना ने मामले को और गंभीर बना दिया है। घटना को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा और निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है।

हालांकि, हत्या की परिस्थितियों, घटना में शामिल लोगों और जमीन विवाद से इसके संभावित संबंध की पुष्टि पुलिस जांच के आधार पर ही हो सकेगी। यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि मृतक पर हमला किन परिस्थितियों में हुआ और क्या घटना का संबंध पहले की गई शिकायतों से था।

ऐसे मामलों में घटना से जुड़े प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्य जांच के महत्वपूर्ण आधार होते हैं।

मुख्यमंत्री और उच्च अधिकारियों से न्याय की गुहार

शिकायतकर्ता की ओर से पहले मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी जौनपुर और उपजिलाधिकारी केराकत सहित संबंधित अधिकारियों से शिकायत किए जाने की बात कही गई है। अब हत्या की सूचना के बाद पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है।

मांग है कि जमीन विवाद, IG​​RS शिकायतों के निस्तारण, कथित धन मांग और हत्या की घटना के बीच किसी संभावित संबंध की जांच की जाए। साथ ही, आराजी संख्या 839 और 840 से संबंधित राजस्व अभिलेखों का परीक्षण कर जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए।

यदि जांच में किसी अधिकारी या अन्य व्यक्ति की संलिप्तता अथवा लापरवाही प्रमाणित होती है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

अब जांच और जवाबदेही पर टिकी नजरें

यह मामला जमीन विवाद के साथ-साथ शिकायत निस्तारण की प्रक्रिया और नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े सवाल भी खड़े करता है। यदि पहले की गई शिकायतों में अनियमितता हुई है, तो उसकी जांच कर जिम्मेदारी तय करना जरूरी होगा। वहीं, हत्या की घटना की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कर दोषियों की पहचान करना पुलिस के लिए महत्वपूर्ण होगा।

फिलहाल, इस मामले में आरोपों की आधिकारिक पुष्टि, संबंधित राजस्व अधिकारियों का पक्ष और पुलिस जांच की स्थिति सामने आना बाकी है। इन तथ्यों के स्पष्ट होने के बाद ही यह निर्धारित हो सकेगा कि जमीन विवाद और हत्या की घटना के बीच कोई संबंध था या नहीं।

नोट: समाचार में उल्लिखित आरोप शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से लगाए गए हैं। उनकी स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का आधिकारिक बयान मिलने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

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