धान की कटाई और गेहूं की बोआई के सीजन को देखते हुए फैसला, वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए संशोधित आदेश जारी
लखनऊ (उत्तर प्रदेश):- उत्तर प्रदेश में धान की कटाई और गेहूं की बोआई के व्यस्त सीजन के दौरान किसानों को पर्याप्त श्रमिक उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश में 1 नवंबर से 20 नवंबर 2026 तक मनरेगा के तहत होने वाले कार्य निलंबित रहेंगे। ग्राम्य विकास विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कार्य निलंबन की अवधि में संशोधन करते हुए आदेश जारी किया है।
20 दिन तक नहीं होंगे योजना के काम
सरकार का उद्देश्य कृषि कार्यों के महत्वपूर्ण समय में किसानों को मजदूरों की कमी का सामना न करना पड़े, यह सुनिश्चित करना है। नवंबर में धान की कटाई के साथ गेहूं की बोआई की तैयारी और शुरुआत होती है। ऐसे में खेतों में श्रमिकों की मांग बढ़ जाती है।
योजना के तहत निर्धारित अवधि में काम रोकने से कृषि कार्यों के लिए श्रमिकों की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है। यह निर्णय प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में खेती-किसानी के सीजन को ध्यान में रखकर लिया गया है।
सभी जिलाधिकारियों को भेजी गई जानकारी
ग्राम्य विकास विभाग के प्रमुख सचिव ने संशोधित आदेश की जानकारी प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को भेज दी है। संबंधित अधिकारियों को नई समय-सीमा के अनुसार व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पूर्व में जारी निर्देशों के अन्य सभी प्रावधान यथावत रहेंगे।
किसानों और ग्रामीण श्रमिकों पर क्या होगा असर?
इस फैसले से सरकार को उम्मीद है कि धान की कटाई और गेहूं की बोआई के दौरान किसानों को खेतों में काम करने के लिए पर्याप्त मजदूर मिल सकेंगे। हालांकि, योजना के कार्य निलंबित रहने की अवधि में ग्रामीण रोजगार से जुड़ी व्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह स्थानीय परिस्थितियों और कृषि कार्यों की मांग पर निर्भर करेगा।