लंदन/नई दिल्ली। भारत के भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को ब्रिटेन की एक अदालत से बड़ा झटका लगा है। लंदन के उच्च न्यायालय ने नीरव मोदी को बैंक ऑफ इंडिया को 110 लाख अमेरिकी डॉलर (करीब 11 मिलियन डॉलर) से अधिक की राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया है।
यह मामला दुबई स्थित कंपनी फायरस्टार डायमंड एफ.जेड.ई. को दिए गए ऋण से जुड़ा है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि इस ऋण के संबंध में दी गई व्यक्तिगत गारंटी के तहत नीरव मोदी भुगतान के लिए उत्तरदायी हैं।
मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति साइमन टिंकलर ने कहा कि बैंक ऑफ इंडिया द्वारा अक्टूबर 2025 में जारी किया गया मांग नोटिस भारतीय कानून के तहत वैध और लागू करने योग्य है। अदालत ने बैंक के पक्ष में फैसला सुनाते हुए नीरव मोदी की दलीलों को खारिज कर दिया।
फैसले के अनुसार, नीरव मोदी ने ऋण के लिए व्यक्तिगत गारंटी दी थी, जिसके चलते बैंक बकाया राशि की वसूली का हकदार है। अदालत ने माना कि बैंक की मांग कानूनी रूप से उचित है और उसके आधार पर भुगतान का आदेश दिया जा सकता है।
गौरतलब है कि नीरव मोदी भारत के बहुचर्चित बैंक धोखाधड़ी मामलों में मुख्य आरोपियों में शामिल है। वह लंबे समय से ब्रिटेन में कानूनी लड़ाई लड़ रहा है और भारत उसे प्रत्यर्पित कराने की कोशिश कर रहा है। भारतीय जांच एजेंसियां उस पर हजारों करोड़ रुपये के कथित बैंक घोटाले में संलिप्त होने का आरोप लगा चुकी हैं।
लंदन उच्च न्यायालय का यह फैसला बैंक ऑफ इंडिया के लिए महत्वपूर्ण कानूनी सफलता माना जा रहा है। साथ ही यह उन प्रयासों को भी मजबूती देता है जिनके तहत भारतीय बैंकों और एजेंसियों द्वारा विदेशों में मौजूद आर्थिक अपराध के आरोपियों से बकाया राशि की वसूली की जा रही है।