विदेशों में कार्यरत वैज्ञानिकों को भारत लौटने का न्योता, सालाना 60 लाख रुपये वेतन और 5 करोड़ रुपये तक शोध अनुदान

 

नई दिल्ली। भारत सरकार देश के प्रतिभाशाली वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को विदेशों से वापस लाने के लिए एक महत्वाकांक्षी पहल पर काम कर रही है। इस योजना के तहत विदेशों में कार्यरत भारतीय और विदेशी शोधकर्ताओं को आकर्षक वेतन तथा बड़े पैमाने पर शोध अनुदान की पेशकश की जा रही है।

प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, चयनित शोधकर्ताओं को प्रतिवर्ष 60 लाख रुपये तक का वेतन दिया जा सकता है। इसके साथ ही उन्हें अपने अनुसंधान कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए 5 करोड़ रुपये तक का शोध अनुदान भी उपलब्ध कराया जाएगा।

सरकार का उद्देश्य देश में उच्च स्तरीय अनुसंधान को बढ़ावा देना, वैश्विक प्रतिभाओं को भारतीय संस्थानों से जोड़ना और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की क्षमता को मजबूत करना है। इस पहल के माध्यम से उन भारतीय वैज्ञानिकों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा जो वर्तमान में दुनिया के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों में कार्यरत हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर वेतन, अत्याधुनिक शोध सुविधाएं और पर्याप्त वित्तीय सहायता मिलने से भारत में अनुसंधान एवं नवाचार का वातावरण और मजबूत होगा। इससे कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव प्रौद्योगिकी, क्वांटम विज्ञान, अंतरिक्ष अनुसंधान, स्वास्थ्य विज्ञान और उन्नत इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति संभव हो सकती है।

सरकार का मानना है कि प्रतिभा पलायन की चुनौती से निपटने और वैश्विक स्तर की शोध क्षमता विकसित करने के लिए यह कदम महत्वपूर्ण साबित होगा। साथ ही इससे भारतीय विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों की अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता भी बढ़ेगी।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र के जानकारों के अनुसार, यदि यह पहल प्रभावी ढंग से लागू होती है तो आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक अनुसंधान और नवाचार के प्रमुख केंद्रों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।

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