नई दिल्ली। भगवान शिव के जयकारों और गूंजते “हर-हर महादेव” तथा “बम-बम भोले” के उद्घोष के बीच कैलास मानसरोवर यात्रा 2026 का पहला जत्था श्रद्धा और उत्साह के साथ रवाना हो गया। यात्रियों के चेहरों पर आध्यात्मिक ऊर्जा और शिवधाम के दर्शन की खुशी साफ दिखाई दे रही थी।
रवाना होने से पहले यात्रियों ने पूजा-अर्चना कर भगवान शिव का आशीर्वाद लिया। इस दौरान परिजनों और शुभचिंतकों ने यात्रियों को मंगलमय यात्रा की शुभकामनाएं दीं। पूरे वातावरण में भक्ति और उत्साह का माहौल देखने को मिला।
कैलास मानसरोवर यात्रा हिंदू, बौद्ध, जैन और बोन परंपरा के अनुयायियों के लिए अत्यंत पवित्र मानी जाती है। तिब्बत में स्थित कैलास पर्वत को भगवान शिव का निवास माना जाता है, जबकि मानसरोवर झील को आध्यात्मिक शुद्धि और मोक्ष का प्रतीक माना जाता है।
यात्रा के लिए चयनित श्रद्धालुओं को स्वास्थ्य परीक्षण, सुरक्षा निर्देशों और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में यात्रा से संबंधित विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। प्रशासन और संबंधित एजेंसियों ने यात्रियों की सुरक्षा एवं सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं।
यात्रियों ने कहा कि कैलास मानसरोवर के दर्शन करना उनके जीवन का एक बड़ा सपना था और इस यात्रा का हिस्सा बनना उनके लिए सौभाग्य की बात है। कई श्रद्धालुओं ने इसे जीवन की सबसे महत्वपूर्ण आध्यात्मिक यात्राओं में से एक बताया।
केंद्र सरकार और संबंधित विभागों के सहयोग से आयोजित इस यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है। आने वाले दिनों में अन्य जत्थे भी निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार रवाना होंगे।
आस्था, अध्यात्म और कठिन पर्वतीय मार्गों से गुजरने वाली कैलास मानसरोवर यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आत्मिक अनुभव और साधना का भी प्रतीक मानी जाती है। इस वर्ष की यात्रा के सफल संचालन को लेकर प्रशासन और श्रद्धालु दोनों आशान्वित हैं।