नेपाल में ‘जेन-ज़ेड क्रांति’ के पोस्टर बॉय बालेन शाह आखिर क्यों घिरने लगे

नेपाल :- नेपाल की राजनीति में युवा बदलाव का चेहरा बनकर उभरे बालेन शाह कभी जेन-ज़ेड क्रांति के सबसे बड़े प्रतीक माने जा रहे थे। रैपर से नेता बने बालेन ने भ्रष्टाचार विरोधी छवि और व्यवस्था परिवर्तन के वादों के दम पर युवाओं का जबरदस्त समर्थन हासिल किया। लेकिन सत्ता में आने के कुछ ही महीनों बाद अब वही बालेन आलोचनाओं और सवालों के घेरे में दिखाई देने लगे हैं।

नेपाल में 2025 के जेन-ज़ेड आंदोलन ने पुरानी राजनीतिक व्यवस्था के खिलाफ बड़ा माहौल बनाया था। सोशल मीडिया प्रतिबंध और भ्रष्टाचार के आरोपों के खिलाफ हजारों युवा सड़कों पर उतर आए थे। इस आंदोलन ने तत्कालीन सरकार को हिला दिया और आखिरकार सत्ता परिवर्तन का रास्ता खुला। इसी माहौल में बालेन शाह एक नए और साफ छवि वाले नेता के रूप में उभरे।

2026 के चुनाव में उनकी पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की और बालेन नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्री बने। युवाओं को उम्मीद थी कि अब राजनीति में पारदर्शिता आएगी रोजगार बढ़ेगा और पुरानी व्यवस्था बदलेगी।

लेकिन सत्ता संभालने के बाद बालेन सरकार पर कई मोर्चों पर सवाल उठने लगे। सरकार की कई बड़ी घोषणाएं समय पर पूरी नहीं हो सकीं। एक सरकारी जवाबदेही रिपोर्ट में कई वादों को “ओवरड्यू” बताया गया। इससे युवाओं के बीच निराशा बढ़ने लगी।

सबसे बड़ा झटका तब लगा जब उनकी सरकार के दो मंत्रियों को भ्रष्टाचार आरोपों के कारण इस्तीफा देना पड़ा। बालेन ने भ्रष्टाचार के खिलाफ “शून्य सहनशीलता” का वादा किया था लेकिन शुरुआती महीनों में ही उनकी टीम विवादों में घिर गई।

इसके अलावा छात्र राजनीति और ट्रेड यूनियनों पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश ने भी बालेन सरकार को मुश्किल में डाल दिया। नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार के फैसले पर रोक लगा दी जिसे उनकी पहली बड़ी कानूनी हार माना गया। आलोचकों ने कहा कि जो नेता युवाओं की आवाज बनकर उभरे थे वही अब विरोध की आवाज दबाने की कोशिश कर रहे हैं।

बालेन शाह पर यह आरोप भी लगता रहा है कि उन्होंने जेन-ज़ेड आंदोलन की ऊर्जा का राजनीतिक फायदा उठाया लेकिन आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और मौतों पर स्पष्ट नेतृत्व नहीं दिखाया। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों ने उन्हें “राजनीतिक रूप से अस्पष्ट” नेता बताया है।

हालांकि इसके बावजूद बालेन की लोकप्रियता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। नेपाल का बड़ा युवा वर्ग अब भी उन्हें पारंपरिक राजनीतिक दलों से बेहतर विकल्प मानता है। समर्थकों का कहना है कि दशकों पुरानी व्यवस्था को कुछ महीनों में बदलना आसान नहीं है और बालेन को समय दिया जाना चाहिए। नेपाल की राजनीति में बालेन शाह का उदय दक्षिण एशिया की राजनीति में एक बड़े पीढ़ीगत बदलाव का संकेत माना जा रहा है। लेकिन अब असली चुनौती यह है कि क्या वह आंदोलन की राजनीति से आगे बढ़कर स्थायी और प्रभावी शासन दे पाएंगे या नहीं। आने वाले महीनों में यही तय करेगा कि बालेन शाह सिर्फ सोशल मीडिया और युवाओं के पोस्टर बॉय रहेंगे या वास्तव में नेपाल की राजनीति बदल पाएंगे।

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