US China relations (वॉशिंगटन): अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच होने वाली अहम बैठक में ईरान का मुद्दा भी प्रमुखता से उठ सकता है। दोनों नेताओं की मुलाकात ऐसे समय हो रही है, जब अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष और क्षेत्रीय तनाव का असर ऊर्जा बाजारों तथा अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर दिखाई दे रहा है। रॉयटर्स के अनुसार, अमेरिका चीन से ईरान पर उसके प्रभाव का इस्तेमाल करने की उम्मीद कर रहा है, जबकि बीजिंग के तेहरान के साथ करीबी आर्थिक संबंध हैं।
शी चिनफिंग 23 सितंबर को अमेरिका पहुंचे हैं। व्हाइट हाउस के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ज्वाइंट बेस एंड्रयूज पर शी और उनकी पत्नी पेंग लियुआन का स्वागत करेंगे। इसके बाद 24 सितंबर को व्हाइट हाउस में औपचारिक स्टेट अराइवल सेरेमनी होगी। दोनों नेताओं के बीच बातचीत के दौरान द्विपक्षीय संबंधों के साथ अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है।
US China relations: ईरान पर चीन से क्या चाहता है अमेरिका?
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, वॉशिंगटन का मानना है कि चीन का तेहरान पर प्रभाव है और बीजिंग ईरान के साथ अपने संबंधों के जरिए मौजूदा गतिरोध को कम करने में भूमिका निभा सकता है। चीन ईरान के तेल का एक बड़ा खरीदार है और दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध लंबे समय से बने हुए हैं। अमेरिकी प्रशासन ने ईरान के साथ चीन के वित्तीय और व्यापारिक संबंधों को लेकर भी चिंता जताई है।
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने भी संकेत दिया है कि चीन के ईरान से जुड़े वित्तीय संबंध ट्रंप-शी वार्ता के एजेंडे में रह सकते हैं। हालांकि, रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिका ने चीन के प्रमुख बैंकों पर ईरान से जुड़े मामलों में तत्काल व्यापक प्रतिबंध लगाने से परहेज किया है।
US China relations: चीन का ईरान को लेकर रुख
चीन ने ईरान के साथ अपने संबंध बनाए रखे हैं, लेकिन बीजिंग की ओर से यह संकेत भी दिया गया है कि वह ईरान को सैन्य सहायता देने के अमेरिकी आरोपों को स्वीकार नहीं करता। मौजूदा ट्रंप-शी बैठक में ईरान के अलावा व्यापार, ताइवान, तकनीक, दुर्लभ खनिज और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे मुद्दे भी चर्चा में रहने की संभावना है।
ट्रंप-शी मुलाकात क्यों अहम?
शी चिनफिंग का यह अमेरिका दौरा एक दशक से अधिक समय में उनका पहला स्टेट विजिट है। व्हाइट हाउस के कार्यक्रम के मुताबिक, 24 सितंबर को औपचारिक स्वागत समारोह और स्टेट डिनर होगा, जबकि 25 सितंबर को दोनों नेताओं का कार्यक्रम नेशनल आर्काइव्स की यात्रा के साथ समाप्त होगा।
अमेरिका-चीन संबंधों में व्यापार और तकनीकी प्रतिस्पर्धा के साथ ताइवान और ईरान जैसे मुद्दे भी तनाव का कारण बने हुए हैं। ऐसे में ट्रंप और शी की वार्ता से इन मुद्दों पर दोनों देशों के रुख और संभावित समझ के संकेत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, बैठक से पहले किसी ठोस समझौते या परिणाम की पुष्टि नहीं हुई है।