SIR Controversy (नई दिल्ली): चुनाव आयोग की Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोलते हुए उन पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की विचारधारा को आगे बढ़ाने का आरोप लगाया और उनके इस्तीफे की मांग की।
खरगे ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की मौजूदा कार्यप्रणाली को लेकर विपक्ष की चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं। उन्होंने CEC पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें चुनाव आयोग की संवैधानिक भूमिका के अनुरूप निष्पक्ष तरीके से काम करना चाहिए। खरगे की यह टिप्पणी SIR को लेकर विपक्षी दलों की ओर से लगातार उठाए जा रहे सवालों के बीच आई है।
SIR को लेकर कांग्रेस के सवाल
SIR यानी Special Intensive Revision का उद्देश्य मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण करना है। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल इस प्रक्रिया की पद्धति और मतदाताओं के नामों को लेकर उठने वाले संभावित सवालों पर आपत्ति जता रहे हैं। खरगे पहले भी SIR को लेकर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर निशाना साध चुके हैं।
21 सितंबर को खरगे ने SIR को लेकर कहा था कि यह प्रक्रिया BJP नेताओं को भी प्रभावित कर रही है। उन्होंने दिल्ली में कई प्रमुख लोगों को नोटिस मिलने का हवाला देते हुए SIR की प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे।
SIR Controversy: CEC के इस्तीफे की मांग
खरगे ने मौजूदा विवाद के बीच CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। उनका आरोप है कि चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष के मन में निष्पक्षता से जुड़े सवाल पैदा हुए हैं। कांग्रेस की ओर से SIR को लेकर चुनाव आयोग की भूमिका की समीक्षा और प्रक्रिया पर रोक लगाने जैसी मांगें भी सामने आती रही हैं।
हालांकि, इन आरोपों के बीच चुनाव आयोग ने अपने स्तर पर अलग स्थिति स्पष्ट की है। 26 सितंबर को हुई बैठक के बाद ECI ने कहा कि SIR से संबंधित आदेश और कार्यक्रम तीनों चुनाव आयुक्तों—CEC ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—की सहमति से मंजूर किए गए थे। आयोग ने इसे सर्वसम्मति से लिया गया निर्णय बताया।
विपक्ष और चुनाव आयोग आमने-सामने
SIR को लेकर विपक्षी दलों की आपत्तियां केवल कांग्रेस तक सीमित नहीं हैं। अलग-अलग विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची में बदलाव और आयोग के भीतर कथित मतभेदों को लेकर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, ECI ने SIR के फैसलों को सर्वसम्मति से मंजूर किए जाने की बात कही है।
ऐसे में SIR को लेकर राजनीतिक बहस आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है। फिलहाल खरगे की मांग राजनीतिक विपक्ष की स्थिति को दर्शाती है, जबकि चुनाव आयोग अपने फैसलों को सर्वसम्मत बता रहा है।