Lower Courts Judge Vacancy (नई दिल्ली):- देश की न्यायिक व्यवस्था के निचले स्तर पर जजों की भारी कमी सामने आई है। कानून और न्याय मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 3 अगस्त 2026 तक भारत की जिला और निचली अदालतों में 7,310 न्यायिक पद खाली पड़े थे। यह कुल स्वीकृत पदों का एक-चौथाई से भी ज्यादा है।
आंकड़ों के अनुसार, देशभर की जिला अदालतों में जजों के कुल 30,868 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से सिर्फ 23,558 पदों पर ही जज काम कर रहे हैं। यानी हर चार में से करीब एक जज का पद खाली है। इससे न्याय मिलने में देरी और केसों के पेंडिंग होने की समस्या और बढ़ रही है।
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Lower Courts Judge Vacancy: कर्नाटक में सबसे बुरा हाल, 58% पद खाली
रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा कर्नाटक से सामने आया है। यहां खाली पदों की दर सबसे ज्यादा 58% है। राज्य में कुल 1,640 न्यायिक पद खाली हैं। यह देश में सबसे अधिक प्रतिशत है और इससे राज्य की न्यायिक व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
Lower Courts Judge Vacancy: यूपी में 1,082 पद खाली, गुजरात-झारखंड भी लिस्ट में
संख्या के लिहाज से उत्तर प्रदेश में दूसरे सबसे ज्यादा पद खाली हैं। यूपी में 1,082 जजों के पद रिक्त हैं, जो कुल स्वीकृत पदों का 29% है।
अन्य राज्यों की बात करें तो गुजरात में 535 पद (31%), झारखंड में 212 पद (30%), ओडिशा में 329 पद (27.8%), अरुणाचल प्रदेश में 14 पद (26.4%), छत्तीसगढ़ में 177 पद (26.1%), आंध्र प्रदेश में 174 पद (23.5%), तेलंगाना में 145 पद (23.4%) और पश्चिम बंगाल में 230 पद (20.8%) खाली हैं।
खास बात यह है कि चार्ट में शामिल सभी राज्यों में खाली पदों की दर 20% से ज्यादा है, जो एक गंभीर चिंता का विषय है।
विशेषज्ञों का मानना है कि निचली अदालतों में जजों की कमी के कारण ही लाखों केस सालों से लंबित हैं। सरकार को जल्द से जल्द भर्ती प्रक्रिया तेज करनी होगी ताकि आम लोगों को समय पर न्याय मिल सके।