नई दिल्ली :- भारत को वैश्विक तकनीकी ताकत बनाने और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण में आत्मनिर्भर बनने के लिए बड़े स्तर पर सेमीकंडक्टर उद्योग विकसित करना होगा। नीति आयोग की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार देश को लगभग 129 से 150 अरब डॉलर की मजबूत सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन तैयार करने की आवश्यकता है। इससे भारत वैश्विक चिप निर्माण उद्योग में अपनी मजबूत पहचान बना सकेगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले वर्षों में दुनिया भर में सेमीकंडक्टर की मांग तेजी से बढ़ने वाली है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, 5G, इलेक्ट्रिक वाहन, डेटा सेंटर, स्मार्टफोन और रक्षा क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले आधुनिक उपकरणों के कारण चिप्स की जरूरत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में भारत के पास इस क्षेत्र में बड़ा अवसर मौजूद है।
नीति आयोग का मानना है कि यदि भारत सही रणनीति के साथ निवेश और तकनीकी विकास पर ध्यान देता है, तो वह वैश्विक सप्लाई चेन का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। इसके लिए चिप डिजाइन, वेफर निर्माण, पैकेजिंग, टेस्टिंग और रिसर्च जैसे क्षेत्रों में बड़े निवेश की जरूरत होगी।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत के पास कुशल इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों की बड़ी संख्या मौजूद है, जिसका फायदा उठाया जा सकता है। हालांकि सेमीकंडक्टर उद्योग को विकसित करने के लिए अत्याधुनिक तकनीक, भारी पूंजी निवेश और लंबी अवधि की नीतिगत स्थिरता बेहद जरूरी होगी।
सरकार पहले ही सेमीकंडक्टर मिशन के तहत कई प्रोत्साहन योजनाएं शुरू कर चुकी है। देश में चिप निर्माण इकाइयां स्थापित करने के लिए घरेलू और विदेशी कंपनियों को आकर्षित किया जा रहा है। गुजरात और अन्य राज्यों में कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम भी शुरू हो चुका है।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि भारत इस क्षेत्र में मजबूत आधार तैयार कर लेता है, तो इससे लाखों रोजगार पैदा होंगे और इलेक्ट्रॉनिक्स आयात पर निर्भरता कम होगी। साथ ही भारत वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में चीन, अमेरिका, ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों को चुनौती देने की स्थिति में आ सकता है।नीति आयोग की यह रिपोर्ट स्पष्ट संकेत देती है कि आने वाला दशक भारत के लिए सेमीकंडक्टर क्रांति का दौर साबित हो सकता है, बशर्ते सरकार और उद्योग जगत मिलकर दीर्घकालिक रणनीति के साथ आगे बढ़ें।