Shatrughan Sinha (मुंबई):- बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता और बेबाक अंदाज के लिए मशहूर शत्रुघ्न सिन्हा ने एक बार फिर अपने दिल के करीब रहे लोगों को याद किया है। हाल ही में ANI को दिए एक इंटरव्यू में ‘बिहारी बाबू’ ने हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर और उस दौर की सच्ची दोस्ती के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने खास तौर पर ट्रैजेडी किंग दिलीप कुमार को लेकर जो कहा, वो हर सिनेमा प्रेमी के दिल को छू जाएगा।
Shatrughan Sinha: दिलीप साहब एक संस्था थे
शत्रुघ्न सिन्हा ने 1981 में आई सुपरहिट फिल्म ‘क्रांति’ में दिलीप कुमार के साथ काम किया था। उस अनुभव को याद करते हुए वे भावुक हो गए। उन्होंने कहा, “वो एक संस्था थे, और क्या कहूं? दिलीप साहब… ये मेरा परम सौभाग्य था कि उनका मुझ पर अथाह स्नेह था। मुझे उनका आशीर्वाद और प्यार मिला।

उन्होंने आगे कहा कि भले ही उन्होंने पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) से एक्टिंग की पढ़ाई की, लेकिन असली एक्टिंग की पाठशाला उनके लिए दिलीप साहब ही थे। शत्रुघ्न ने कहा, मैं FTII से पास हुआ, फिर भी मैं हमेशा कहता हूं कि मैं दिलीप साहब को अपने आप में एक संस्था मानता था। वह इतने काबिल, इतने प्रतिभाशाली और इतने शानदार इंसान थे। ऐसे लोग सदियों में एक बार पैदा होते हैं। वह हमारी फिल्म इंडस्ट्री की शान, मान और गौरव थे।
गौरतलब है कि शत्रुघ्न सिन्हा हमेशा से दिलीप कुमार को अपना आदर्श मानते आए हैं। दिलीप साहब के निधन के बाद भी कई बार वे उन्हें सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि दे चुके हैं।
Shatrughan Sinha: सुभाष घई हैं परिवार जैसे दोस्त
बॉलीवुड में जहां दोस्ती और दुश्मनी दोनों ही आम हैं, वहीं शत्रुघ्न सिन्हा ने अपनी सच्ची दोस्ती का भी जिक्र किया। जब उनसे पूछा गया कि इंडस्ट्री में उनका सबसे करीबी दोस्त कौन है, तो उन्होंने बिना देर किए फिल्ममेकर सुभाष घई का नाम लिया।उन्होंने कहा, सुभाष घई एक पारिवारिक मित्र हैं, शुरू से ही एक शानदार दोस्त हैं। शत्रुघ्न और सुभाष घई की दोस्ती FTII के दिनों से है और दोनों ने मिलकर कालीचरण और विश्वनाथ जैसी हिट फिल्में भी दी हैं।
Shatrughan Sinha: सुनहरे दौर की यादें
शत्रुघ्न सिन्हा ने मनोज कुमार और धर्मेंद्र के साथ भी अपनी दोस्ती को याद किया। उन्होंने कहा कि उस दौर में कंपटीशन तो था, लेकिन दिलों में एक दूसरे के लिए सम्मान भी था। आज के दौर में जहां सोशल मीडिया पर सब कुछ दिखावे के लिए होता है, उस दौर की दोस्ती निस्वार्थ और गहरी थी।
शत्रुघ्न सिन्हा का ये इंटरव्यू सिर्फ एक इंटरव्यू नहीं, बल्कि उस दौर की झलक है जब रिश्ते स्क्रिप्ट से नहीं, दिल से बनते थे। दिलीप साहब के प्रति उनका सम्मान यह दिखाता है कि सच्चा कलाकार हमेशा अपने से बड़े कलाकार का सम्मान करना जानता है।